Agniveer Fan

स्वामी दयानंद कृत अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश पर रचना काल से ही स्वामी जी मान्यतायों के विषय में अनेक शंकाएं विभिन्न विभिन्न मतों के सदस्यों द्वारा समय समय पर प्रस्तुत की जाती रही हैं। स्वामी दयानंद जी महाराज सत्यार्थ प्रकाश की भूमिका में स्वयं लिखते हैं की

यद्यपि आजकल बहुत से विद्वान प्रत्येक मतों में हैं,वे पक्षपात छोड़ सर्व तंत्र सिद्धांत अर्थात जो जो बातें सब के अनुकूल सब में सत्य हैं, उनका ग्रहण और जो एक दूसरे से विरुद्ध बातें हैं, उनका त्याग कर परस्पर प्रीति से वर्ते वर्तावें तो जगत का पूर्ण हित होवे। क्यूंकि विद्वानों के विरोध से अविद्वानों में विरोध बढ़ कर अनेक विध दुःख की वृद्धि और सुख की हानि होती हैं। इस हानि ने, जो की स्वार्थी मनुष्यों को प्रिय हैं, सब मनुष्यों को दुःख सागर में डुबा दिया हैं। “

स्वामी दयानंद जी के इस आशय…

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I am a person with various interests. I shall update it later.
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